ताओ है झुकने कि कला, अंतिम होने की कला और ख़ाली होने की कला

ताओ को समझने से पूर्व यह ज़रूरी है कि इसे समझा जाए: कर्मयोगियों के लिए ओशो ने कहा कि “तुम ध्यानपूर्वक कर्म करने लगो। जो भी करो, मूर्च्छा में मत करो, होशपूर्वक करो। करते समय जागे रहो”ज्ञानयोगीयों को ओशो ने कहा “ तुम विचार में ही मिलाकर ध्यान को पी जाओ। विचार को रोको मत; … Continue reading ताओ है झुकने कि कला, अंतिम होने की कला और ख़ाली होने की कला