We are the puppet and puppeteer both!

Curtesy Indian Institute of Crafts and Design, Jaipur, Rajasthan, India. A puppeteer is one who prepares a script for the puppet show, then design its characters and provides them the desired quality and mechanism so as to be able to produce the desired character to its perfection! Then attaches threads to the puppet at various … Continue reading We are the puppet and puppeteer both!

जो होता है वो दिखता नहीं

Video of my master Osho’s journey to help people get enlightened through ‘Dynamic Meditation’ https://www.facebook.com/AisDhammoSanantano/posts/3525382207486043 जो होता है वो दिखता नहीं, जो दिखता है वो होता नहीं । दिखने की दुनिया जन्नत है, होने की दुनिया बस नज़ारा है॥ एक सिंहासन दिखता है, जैसे कई हुए वैसे ही लेकिन उनमें से कितने बचे? माना कि … Continue reading जो होता है वो दिखता नहीं

Can garbage be prayed as God?

Mystic Meerabai, (it seems to me that she applied teachings of Jesus on God himself and) fell in love with Lord Krishna leaving her married husband and ultimately found God as her husband. Photo of Meerabai at her Temple in Chittorgarh, Rajasthan, (curtesy :Sardar trilochansingh booksellers) main temple at Merta City, Rajasthan,India There was a … Continue reading Can garbage be prayed as God?

God is not only in Temples, Mosques, Churches etc.

God is not only in Temples, Mosques, Churches etc. but everywhere, in everyone and from eternity to eternity. Sages and mystics all over the planet have again and again taught people of their time about their uniqueness of being born as a human being on this planet. Based on their teachings I may conclude that … Continue reading God is not only in Temples, Mosques, Churches etc.

Yes. We exist and don’t exist simultaneously!

Kabir in his one of the couplet said: समूँद नहीं सीप बिन, स्वाति बूँद भी नाहीं। कबीर मोती नीपजे, सून्य सिसिर गह गाँठी॥Means: The Ocean, the sky and droplets from sky exists because the bivalve sea shell has to form Pearl out of it. Because God always is in favour of transformation be it of … Continue reading Yes. We exist and don’t exist simultaneously!

मन रे ! तू काहे ना धीर धरे-गाने का ओशो संन्यासी वर्ज़न

मन रे ! तू काहे ना धीर धरे जग निर्मोही, मोह ना जाने, उसका तू मोह करे मन रे ! तू काहे ना धीर धरे इस जीवन की चढ़ती ढलती धुप को जिसने बाँधा रंग को जिसने बिखराया और रूप को जिसने ढाला उसे काहे ना सिमर करे? मन रे ! तू काहे ना धीर … Continue reading मन रे ! तू काहे ना धीर धरे-गाने का ओशो संन्यासी वर्ज़न

क्या कोई ऐसा घर भी हो सकता है जिसमें मृत्यु असम्भव हो?

किसी भी घर को बनाते समय कितना ही मज़बूत या लचीला बनाया जाए उसमें प्रवेश के लिए द्वार बनाया ही जाएगा। और जिस द्वार से इंसान प्रवेश कर सकता है उसी द्वार से मृत्यु भी एक दिन प्रवेश कर सकती है। भवन बनाने की सबसे बेहतरीन टेक्नॉलोजी का उपयोग करके भी हम बस यही कह … Continue reading क्या कोई ऐसा घर भी हो सकता है जिसमें मृत्यु असम्भव हो?

ताओ, साक्षी और ओशो

ताओ को समझने के लिए पहले यह जानना ज़रूरी है कि आख़िर यह है क्या? इसको pathless path कहा तो यह ऐसा है जैसे माला के मोतियों के बीच से निकलने वाले धागे का रास्ता. यह सब मोतियों को एक नियम के अनुसार बांधे रखता है। जो धागा पिरोया जाएगा उसके लिए रास्ता लेकिन यह … Continue reading ताओ, साक्षी और ओशो

ताओ है झुकने कि कला, अंतिम होने की कला और ख़ाली होने की कला

ताओ को समझने से पूर्व यह ज़रूरी है कि इसे समझा जाए: कर्मयोगियों के लिए ओशो ने कहा कि “तुम ध्यानपूर्वक कर्म करने लगो। जो भी करो, मूर्च्छा में मत करो, होशपूर्वक करो। करते समय जागे रहो”ज्ञानयोगीयों को ओशो ने कहा “ तुम विचार में ही मिलाकर ध्यान को पी जाओ। विचार को रोको मत; … Continue reading ताओ है झुकने कि कला, अंतिम होने की कला और ख़ाली होने की कला

प्रेम, प्रथम कभी नहीं और अति कभी नहीं

लाओ त्ज़ु ने ताओ को समझने के लिए, जीवन में उतारने के लिए तीन नियम दिए हैं। जो सबसे अंतिम होने को राज़ी है, या जो कभी प्रथम होने की दौड़ में नहीं रहा वही ताओमयी जीवन जीने का अधिकारी है। प्रेम ही जीवन का आधार हो। ओशो के सबसे महत्वपूर्ण संदेश ‘प्रेम के ३ … Continue reading प्रेम, प्रथम कभी नहीं और अति कभी नहीं