मन रे ! तू काहे ना धीर धरे-गाने का ओशो संन्यासी वर्ज़न

मन रे ! तू काहे ना धीर धरे जग निर्मोही, मोह ना जाने, उसका तू मोह करे मन रे ! तू काहे ना धीर धरे इस जीवन की चढ़ती ढलती धुप को जिसने बाँधा रंग को जिसने बिखराया और रूप को जिसने ढाला उसे काहे ना सिमर करे? मन रे ! तू काहे ना धीर … Continue reading मन रे ! तू काहे ना धीर धरे-गाने का ओशो संन्यासी वर्ज़न

क्या कोई ऐसा घर भी हो सकता है जिसमें मृत्यु असम्भव हो?

किसी भी घर को बनाते समय कितना ही मज़बूत या लचीला बनाया जाए उसमें प्रवेश के लिए द्वार बनाया ही जाएगा। और जिस द्वार से इंसान प्रवेश कर सकता है उसी द्वार से मृत्यु भी एक दिन प्रवेश कर सकती है। भवन बनाने की सबसे बेहतरीन टेक्नॉलोजी का उपयोग करके भी हम बस यही कह … Continue reading क्या कोई ऐसा घर भी हो सकता है जिसमें मृत्यु असम्भव हो?

ताओ, साक्षी और ओशो

ताओ को समझने के लिए पहले यह जानना ज़रूरी है कि आख़िर यह है क्या? इसको pathless path कहा तो यह ऐसा है जैसे माला के मोतियों के बीच से निकलने वाले धागे का रास्ता. यह सब मोतियों को एक नियम के अनुसार बांधे रखता है। जो धागा पिरोया जाएगा उसके लिए रास्ता लेकिन यह … Continue reading ताओ, साक्षी और ओशो

ताओ है झुकने कि कला, अंतिम होने की कला और ख़ाली होने की कला

ताओ को समझने से पूर्व यह ज़रूरी है कि इसे समझा जाए: कर्मयोगियों के लिए ओशो ने कहा कि “तुम ध्यानपूर्वक कर्म करने लगो। जो भी करो, मूर्च्छा में मत करो, होशपूर्वक करो। करते समय जागे रहो”ज्ञानयोगीयों को ओशो ने कहा “ तुम विचार में ही मिलाकर ध्यान को पी जाओ। विचार को रोको मत; … Continue reading ताओ है झुकने कि कला, अंतिम होने की कला और ख़ाली होने की कला

प्रेम, प्रथम कभी नहीं और अति कभी नहीं

लाओ त्ज़ु ने ताओ को समझने के लिए, जीवन में उतारने के लिए तीन नियम दिए हैं। जो सबसे अंतिम होने को राज़ी है, या जो कभी प्रथम होने की दौड़ में नहीं रहा वही ताओमयी जीवन जीने का अधिकारी है। प्रेम ही जीवन का आधार हो। ओशो के सबसे महत्वपूर्ण संदेश ‘प्रेम के ३ … Continue reading प्रेम, प्रथम कभी नहीं और अति कभी नहीं

ताओ की सुंदरतम व्याख्या उसका स्त्रैण गुण

ताओ aggressive नहीं है, receptive है. मातृशक्ति की तरह वह संसार को आपने गर्भ में सम्भाले हुए है और संसार उसके गर्भ में धीरे धीरे बढ़ रहा है। उसी से ऊर्जा ग्रहण करके संसार विकसित हो रहा है। हमारे द्वारा किया गया कोई भी कर्म इसीलिए कोई मायने नहीं रखता है। हम इस संसार रूपी … Continue reading ताओ की सुंदरतम व्याख्या उसका स्त्रैण गुण

साक्षी की साधना

शरीर, मन और आत्मा ->आत्मज्ञान अष्टावक्र महागीता भाग १, #४, पहले प्रश्न का उत्तर  (from "अष्टावक्र महागीता, भाग एक - Ashtavakra Mahageeta, Vol. 1  : युग बीते पर सत्य न बीता,  सब हारा पर सत्य न हारा (Hindi Edition)" by Osho .) Start reading it for free: https://amzn.in/7lDQLig -------------- Read on the go for free - … Continue reading साक्षी की साधना

A watcher of the hill

There are three types of waves in our body and they are defined by six high-lows. Their wavelength differed but they all propagate together. Hunger-Thirst are bodily waves and in a day they attain their both peaks. Happiness-Sadness are mental waves and everyday they too attain their peaks may not be significant to even get … Continue reading A watcher of the hill

You plus God is majority.

How it is possible that we know this very well, still there is fear in our life? In my opinion and it is based on my experience that whenever we feel fear, our mind is at work. So actually the fear exist in our mind! It is tendency of our mind to fluctuate between two … Continue reading You plus God is majority.